प्यार की ईमारत को खण्डहर बनते देख लिया, ताज महल को भी टूट कर बिखरते देख लिया || बाद मरने के भी ना-खुदा हुआ जमाना, हमने सौ बार मरकर भी देख लिया ||

Create a poster for this message
Visits: 122
Download Our Android App