शास्त्रों में कहा है...
परीक्षा संसार की करो.. प्रतीक्षा परमात्मा की करो..
और
समीक्षा अपनी खुद की करो..
पर हम....
परीक्षा परमात्मा की करते है,
प्रतीक्षा सुख की करते है...
और
समीक्षा दूसरों की करते हैं...

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